अब वोटर आईडी में सुधार हुआ बहुत आसान, घर बैठे मोबाइल से ही करें ये काम, voter id can be edited by mobile app and internet, after 6 months

अब आने वाले समय मे हम अपने वोटर आईडी में होने वाली गड़बड़ी के सुधार के लिए दौड़ना नही पड़ेगा, हम चाहे तो इसे घर बैठे ही ठीक कर सकते हैं। कई लोग एक राज्य से दूसरे राज्य में चले जाते हैं तो उन्हें आईडी के लिए परेशान होना पड़ता है। चुनाव आयोग द्वारा चुनाव को डिजिटल बनाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। इसके लिए एक मोबाइल आधारित एप्प भी लॉन्च की जाएगी और यह जून 2018 तक उपलब्ध हो जाएगी।
    इस एप्प का नाम ERONeT (इलेक्टोरल रोल्स सर्विस नेट) है। इसमें मोबाइल पर otp आएगा जिससे हम आईडी में परिवर्तन कर पायेगें। चुनाव आयुक्त ने बताया कि अभी इस बारे में 22 राज्यों ने संपर्क किया है। उन्होंने बताया कि जून तक सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस पर सहमत हो जायेगें। अभी गुजरात और हिमाचल प्रदेश जैसें राज्यों से सहमति नही बन पाई है। आपको हमारी जानकारी पसन्द आये तो हमे लाइक, शेयर करें और सब्सक्राइब/फॉलो जरूर करें।

पैनकार्ड में सुधार करवाते या बनवाते समय ये सावधानी रखें नही तो परेशानी हो सकती है, making new pan card or editing through online use precaution

इंटरनेट कई सारे लोग धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं और यह एक बड़ी चिंता का विषय है। इससे हमें धन की हानि तो होती ही है इसके साथ हमारी प्राइवेट डिटेल भी गलत हाथों में जाने का खतरा भी रहता है। पैनकार्ड के संबंध में हम सेन्टर पर जाकर और ऑनलाइन भी अपना काम कर सकते हैं। कुछ लोग एजेंट के द्वारा भी काम करवाते हैं तो इससे भी उन्हें बहुत ज्यादा पैसा देना पड़ता है, दूसरी तरफ हमारे डॉक्यूमेंट गलत हाथो में जाने का ख़तरा भी रहता है। अगर हम ऑनलाइन अपना काम करना चाहे तो हम यह भी कर सकते हैं। पर हमें ऑथेंटिकेट वेबसाइट पर ही जाना है। हम ये वेबसाइट को अपनी इमेज में दे रहे हैं।
   आयकर विभाग ने कहा है कि उसने पैन कार्ड बनाने का अधिकार दो ही संस्थाओं को दिया है जिनमें NSDL ईगवर्नेन्स इंफ्रास्ट्रक्चर ( NSDL e gov) और uti इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजीस सर्विसेज लिमिटेड शामिल है।इसके अलावा और कोई भी संस्था से आप सम्पर्क न करे और किसी भी वेबसाइट से इसके लिए आवेदन न करे। विभाग ने यह भी कहा है कि अगर आप किसी और वेबसाइट के माध्यम से फॉर्म भरते हैं और पेमेंट करते हैं तो उसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे।

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इन अभिनेताओं का भी पाकिस्तान से है रिश्ता, these actor also have a relationship with pakistan

हमारे चहेते कलाकारों का जन्म देश-विदेश और महाद्वीप के विभिन्न भागों में हुआ है। इनमें से कुछ का जन्म पाकिस्तान में भी हुआ है। अमिताभ बच्चन से लेकर शाहरुख खान तक कई कलाकारों का पाकिस्तान से संबंध रहा है। गोविंदा के पिता अरुण कुमार आहूजा का जन्म पाकिस्तान में हुआ था और वह भारत पाकिस्तान के बटवारे के समय भारत आ गए थे। दिलीप कुमार का जन्म लाहौर में हुआ था, लेकिन वह भारत पाकिस्तान के बटवारे के समय भारत आ गए थे।
  शशि कपूर का जन्म पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था। देवानंद का जन्म गुरुदासपुर पाकिस्तान में हुआ था। अमरीश पुरी का जन्म भी पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था। अमिताभ बच्चन की माँ तेज़ी का जन्म पाकिस्तान के लालपुर शहर में हुआ था, जिसे अब फैसलाबाद कहा जाता है। प्रेम चोपड़ा का जन्म भी पाकिस्तान के लाहौर में ही हुआ था। साधना अभिनेत्री जो अपनी आवाज के लिए भी जानी जाती थी, इनका जन्म भी पाकिस्तान के कराची में हुआ था। शाहरुख के पिता मीरताज मोहम्मद खान का जन्म पेशावर में हुआ था। रितिक के दादा पंजाब के शियाल कोट के रहने वाले थे जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है।

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प्यार क्यों होता है, जाने इसका वैज्ञानिक कारण, why love is happen in our life

वेलेंटाइन के इस वीक में लोग प्रेम के पुजारी बने घूम रहे हैं। लेकिन आप जनना चाहते हैं कि प्यार कैसे होता है, इसके क्या लक्षण होते हैं। इसके लिए हमे शेर-शायरी और कविताओं के अलावा थोड़ी साइन्स की जानकारी होनी चाहिए। कुछ लोगो को कहते सुना होगा कि प्यार में भूंख, नींद, चैन सब उड़ जाती हैं, कहीं भी मन नही लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे क्या विज्ञान है। क्या होता है जब हमें प्यार हो जाता है। हमारी बॉडी से एंडोर्फिन (खुशी का हार्मोन) निकलता है। यह हमारी बॉडी से कई और तरीके से निकलता है, जैसे व्यायाम करके, कुछ मज़ेदार या एक्साइटेड वाला कोई काम करके।
    खुशी, प्रफुल्लता और आनंद का अनुभव कराने वाला हार्मोन ही प्यार में पढ़ने के लिए उत्तरदायी होता है। कभी-कभी हमें लगने लगता है कि हम प्यार में पड़ने के बाद बदल गए हैं तो इसमे भी इसी हार्मोन का हाथ होता है। जब सामने वाले व्यक्ति से प्यार हो जाता है तो उसकी बुरी आदतों पर हमारा ध्यान नही जाता और यही कारण है कि प्यार अंधा होता है, यह भी एंडोर्फिन हार्मोन के कारण होता है।

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भूलकर भी न करें आधार पर लेमिनेशन और प्लास्टिक का बनवाने का सोचे भी नहीं, dont laminate adhar card and do not make it plastic by spend money

आधार हमारी एक बड़ी जरूरत बनता जा रहा है और इसे अपने पास रखना ही पड़ता है। लेकिन ज्यादा समय तक उसे रखने पर यह खराब हो जाता है या मुड़ जाता है। कुछ लोग इस पर लेमिनेशन करवा लेते हैं, जिससे आधार का QR कोड स्कैन होने में परेशानी होती है। इसलिए हमें जिस रूप में मिला है वैसा ही अपने पास रखना चहिए। कुछ लोग इसे प्लास्टिक का बनवाने के लिए 50-300 रुपये खर्च कर देते हैं परंतु फिर भी इसमें स्कैन में दिक्कत आती है। सबसे बड़ी बात ये है कि इससे हमारी प्राइवेसी को खतरा होता है, दुकानदार हमारे आधार कार्ड की कॉपी भी बना सकता है। कुछ लोगों को शिकायत रहती है कि उनका फोटो खराब है या फिर एड्रेस गलत दिया है तो इसे आप स्वयं ही वेबसाइट पर जाकर ठीक कर सकते है और आप आधार सेन्टर पर जाकर भी इसे ठीक कर सकते हैं।
  सेन्टर पर जाने का एक फायदा और है कि इसमें अपना फ़ोटो को भी बदला जा सकता है जबकि घर से वेबसाइट के द्वारा हम फ़ोटो नही बदल सकते हैं। सेंटर पर आधार से जुड़ी किसी भी समस्या के निदान का चार्ज 30 रुपये है (25+ 18 % जीएसटी ) और अगर कोई इससे ज्यादा चार्ज लेता है तो आपको इसकी शिकायत (1947 जो कि टोल फ्री नंबर है ) करना चाहिए। आधार आफिस ने साफ कहा है कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नही होनी चाहिए और इसी कारण आधार सेंटरो की संख्या को घटाकर सीमित भी किया गया है। आधार का समान्य कागज पर प्रिंट भी मान्य है और उसे ब्लैक एंड व्हाइट/ दोनों ही रूपों में स्वीकार किया जाएगा। इसके अलावा इसका कोई भी भाग भी इसके प्रमाण के लिए मान्य है।

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इन 7 संकेतों से पता लगाएं की आपका मोबाइल फोन हैक हो गया है, 7 ways that indicate your smart phone is hack

आपका मोबाइल फ़ोन थोड़ी देर के लिये यहाँ वहां हो जाता है, नजर नही आता तो कितनी बेचैनी हो जाती है, आप कितने परेशान हो जाते हैं। मोबाईल फ़ोन सिर्फ बात करने का ही माध्यम नही रह गया है, बल्कि एक मोबाइल फ़ोन में न जाने इसमें कितनी जानकारियां होती हैं।

हमारे बैंक खाते की डिटेल, लोगो के टेलीफोन नंबर, हमारे नोट्स, कहानियां, कवितायें, आफिस के जरूरी दस्तावेज, आपके आधार पैन कार्ड के नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस की कॉपी और कई चीजें आपके मोबाइल फ़ोन में होती है। इसके अलावा जरूरी वीडियो, आपकी फ़ोटो, आपके गाने जैसी चीजें भी होती हैं।

लेकिन सोचिए क्या होगा अगर आपका फोन हैक हो जाये और आपको पता ही न चले। हम आपको ऐसे 7 संकेत बतायेगें जिससे पता चल सकेगा कि आपका फोन हैक हो गया है।

अगर आपका फोन नार्मल से कम स्पीड से चल रहा है तो हो सकता है कि यह किसी वायरस या मेलेसियस प्रोग्राम के कारण हुआ हो। मेलेसियस प्रोग्राम वह होते हैं जो फोन की परफॉर्मेन्स और यूजर को नुकसान पहुँचा सकते हैं। लेकिन ये ध्यान रखिये की फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम के लगातार अपडेट होने के कारण भी फ़ोन की स्पीड कम होती चली जाती है। एंड्रॉइड या किसी अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम का अपडेट या तो लेटेस्ट मोबाइल में आता है या फिर पुराने में थोड़ी धीमी स्पीड के साथ लांच होता है। इसलिए इससे बहुत ज्यादा परेशान होने की जरूरत नही है। लेकिन सजग रहना तो जरूरी है।

अगर आपका फोन जरूरत से ज्यादा गरम हो जाता है तो हो सकता है कि कोई मेलेसियस एप्पलीकेशन बैकग्राउंड में चल रहा हो। फोन के गरम होने का एक कारण यह भी हो सकता है कि एप्पलीकेशन जिसे हमे बंद करना चाहये था, लेकिन हमने उन्हें ठीक तरीके से बंद नही किया। फोन के लगातार गर्म होने का असर उसकी बैटरी पर पड़ता है, इस कारण अपने फोन की बैटरी अपनी उम्र से कम चल पाती है। अगर आपका अपडेट नया और प्रभावशाली है तो अपने फोन को अपडेट जरूर कर लेना चाहिए।

कुछ मौकों पर फोन के हैक होने की जानकारी हमारे जान पहचान वालो से हो जाती है। कभी आपने ध्यान दिया होगा कि अपने फ़ोन पर अनजान लोगों के मेसेज आ जाते हैं या चले जाते हैं। ऐसे मौकों पर अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को ये मेसेज एसएमएस या व्हाट्सएप के द्वारा मिल जाते हैं, हालाँकि इन मेसेजों को हमने नही भेजा होता है। तो अगली बार कोई आपसे बोले कि ये मेसेज क्यों भेजा है और वो मेसेज आपने नही भेजा है तो ये हैकर की करामात हो सकती है, ऐसी स्थिति में सिर्फ एक बटन पर भरोसा कीजिए और वो है डिलीट। अगर हमे लगता है कि ये मैसेज या लिंक संदेहास्पद है तो हमे किसी भी तरह उस मेसेज या लिंक पर क्लिक नही करना है, उसे देखने से पहले ही डिलीट कर देना है।
अगर आपके मोबाइल में वायरस है तो वो आपकी मर्जी के बिना किसी विंडोज में वो ले जाएगा, नया विंडोज या टैब अपने आप खुलने लगे तो ये इस बात का साफ संकेत है कि कुछ न कुछ गड़बड़ है। कई बार कंप्यूटर में इंटरनेट के कारण नए टैब खुल जाते हैं, फोन में भी ऐसा ही होता है। लेकिन ऐसा होता है तो सावधान रहने की जरूरत है।

अपने फोन को ध्यान से देखे और उसमें कुछ ऐसे एप्पलीकेशन हैं जिन्हें आपने डाउनलोड नही किया है तब भी आपको सावधान हो जाना चाहिए। दूसरी बात ये है कि ऐसी जगह से एप्पलीकेशन डाउनलोड करें जो भरोसेमंद हो यानी बहुत संदेहास्पद प्ले स्टोर से एप्पलीकेशन डाउनलोड नही करना चहिए। एप्पलीकेशन वही से डाउनलोड करना चाहिए जो मशहूर हो या जिनसे आपका फोन चल रहा हो।

कई बार इंटरनेट पर कुछ काम करते हुए अजीब सी आवाज आ रही हो या वेब पेजों पे अनचाही या असमान्य आवाजें आ रही हैं तो इसका मतलब ये है कि किसी ने आपका फोन हैक कर लिया है और वो दूर से आपकी डिवाइस को कंट्रोल कर रहा है। बीप जैसी आवाज अगर आपके कॉल पर आ रही हैं तो इसका ये मतलब भी हो सकता है कि कोई आपका कॉल रिकॉर्ड कर रहा है।

आप अपने फोन में एंटीवायरस रखिये और जिन एप्पलीकेशन को आपने इंस्टॉल नही किया है उन्हें डिलीट कर दें, फ्री के वाई फाई के चक्कर मे मत पढ़िये, कहीं से भी अपने फोन पर इंटरनेट का उपयोग मत कीजिए, कम से कम सार्वजनिक स्थानों के वाई फाई का उपयोग करते हुए सावधान रहिये, अपने फोन में ऐसा पासवर्ड रखिये जिसका अनुमान कोई न लगा सके, पॉपअप पर क्लिक मत कीजिये, अपडेट लगातार इंस्टॉल करते रहिये और इंटरनेट पर कितना डेटा खर्च हो रहा है इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

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गूगल देने जा रहा सबको पत्रकार बनने का मौका, google now introduce Bulletin app and everyone can publish their news

गूगल अब एक नए ऐप की टेस्टिंग कर रहा है जिसके लॉन्च होने के बाद कोई भी लोकल खबरों की रिपोर्टिंग कर सकेगा और खबरों को पब्लिश कर सकेगा। गूगल ने अपने इस एप्प को Bulletin नाम दिया है।यह एप्प फ्री में उपलब्ध होगा और इसका साइज भी कम होगा जिससे बिना वेबसाइट, या ब्लॉग क्रिएट किये फ़ोटो, वीडियो क्लिप, टेक्स्ट को आसानी से पब्लिश किया जा सके।
    रियल टाइम में पोस्ट अपडेट करना, फोटो को जोड़ना जैसा कि स्टोरी की डिमांड है, इसमें सब किया जा सकेगा। बुलेटिन में कोई भी अपने क्षेत्र विशेष की न्यूज़ को पब्लिस कर सकता है। कई बार बड़ी खबरों के चलते लोकल प्रेरणादायक खबरों से लोंगो की पहुँच कम हो जाती है। अभी यह एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में नैशविले में, टेनेसी, ओकलैंड और कैलिफोर्निया में शुरू की गई है। इस ऐप को लेकर गूगल का कहना है कि वह लोकल कवरेज को बढ़ाना चाहता है। नैशविल्ले में बुलेटिंन फीचर के लॉन्चिंग का एक वीडियो भी यूट्यूब पर अपलोड किया गया है। यह ऐप भारत में कब लॉन्च किया जाएगा इसकी फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। गूगल ने उल्लेख किया है कि बुलेटिन कहानियां सार्वजनिक हैं और गूगल सर्च के माध्यम से, सोशल नेटवर्क पर साझा किया जा सकता है, या ईमेल और मैसेजिंग ऐप में लिंक के रूप में भेजा जा सकता है। यह ऐप एंड्रॉइड और आईओएस दोनों के लिए उपलब्ध रहेगा। बुलेटिन जैसी सुविधा स्थानीय संवाददाताओं और समाचार आउटलेटों की मदद करने के लिए एक बड़ी पहल है। इस बीच गूगल को ट्विटर के साथ प्रतिस्पर्धा करना पड़ता है, जो पहले से ही त्वरित और ब्रेकिंग न्यूज़ करता है। गूगल ने बुलेटिन ऐप को लेकर अपने ब्लॉग में कहा है कि अगर आप फोटो क्लिक करने और मैसेज भेज सकते हैं तो आप बुलेटिन स्टोरी आराम से क्रिएट कर सकते हैं।

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अपने स्मार्टफोन की मदद से छुपा हुआ कैमरा खोज सकते हैं , हिडन कैमरा को कैसे पता करें, hiw to find hidden camera

इलेक्ट्रो मैग्नेटिक क्षेत्र को सुनने के लिए अपने सेल फोन का उपयोग करें। अपने सेलफोन पर कॉल करें, फिर डिवाइस की तरफ झुकाएं, जहां आपको लगता है कि कोई कैमरा या माइक्रोफ़ोन हो सकता है। यदि आप कॉल पर एक क्लिक की आवाज सुनते हैं, तो इसका मतलब है कि आपका फोन एक इलेक्ट्रो मैग्नेटिक क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रहा है।

टू वे मिरर- अपने होटल रूम और चेंजिंग रूम में टू वे मिरर को चेक कर लेना चाहिए। प्रत्येक दर्पण भले ही दीवार के साथ लगा हो या एक फ्रेम में रखा हो इसके पीछे कुछ भी नहीं होना चाहिए, इसे खोजने के लिए सभी क्षेत्रों में इसे टैप करें, अगर यह आपको खोखले ध्वनि देता है, तो इसके पीछे कुछ हो सकता है। इसका दूसरा तरीका फिंगर नेल टेस्ट है, अपनी उंगली के नाखून को दर्पण पर 90 के एंगल से टच करे। यदि उंगली का नाखून और उसका प्रतिविम्ब के बीच गैप न हो तो यह टू वे मिरर हो सकता है, जबकि सामान्य दर्पण में कुछ mm का गेप होता है।
    निगरानी के उपयोग करने वाले कैमरे नाईट विज़न वाले भी होते हैं, जिससे रात में भी निगरानी हो सके। वह इंफ्रारेड एलईडी का उपयोग इंफ़्रारेड लाइट को उत्पन्न करने के लिए किया जाता है, और यह इंफ़्रा रेड कैमरे को ही दिखाई देती है। कमरे की सारी लाइट बुझा दे इसके बाद स्मार्टफोन के कैमरे से रूम का निरीक्षण करें, यदि हमे लाल और बैंगनी रंग की लाइट दिखाई दे तो यह नाईट विज़न कैमरा हो सकता है।

स्मार्टफोन की फ़्लैश लाइट भी कैमरा को ढूंढने में मदद कर सकती है। फ्लैशलाइट एप्प डाउनलोड करे और फ़्लैश लाइट को लगातार ऑन और ऑफ वाली मोड पर लगा कर सारे रूम का निरीक्षण करें। यदि कैमरा होगा तो उसमें लाल डॉट लाइट कैमरे से रिफ्लेक्ट होकर आएगी। कुछ माइक्रोफोन में पावर इंडिकेटर लाइट का फंक्शन होता है और लगाने वाला केयरलेस हो तो वह इस फीचर को बंद करना भी भूल सकता है, ऐसे में कुछ छोटे गति संवेदनशील कैमरे अश्राव्य क्लिक या बज्ज की आवाज निकलते हैं।

कमरे की सारी लाइट बंद कर लें फिर लाल या हरे रंग के एलईडी से चारो तरफ उजाला करके देखें, लाइट बंद करने के बाद टॉर्च की रोशनी से सभी दर्पण का निरीक्षण करें, इससे दर्पण एक तरफ से पारदर्शी हो जाएगा जिससे कैमरा दिख सकता है। अंधेरे में पिनहोल कैमरा को देखें, खाली टॉयलेट पेपर को मोड़ लें और आंख से लगा ले और एक आंख को बंद कर ले जैसे दूरबीन हो फिर फ्लैशलाइट जलाएं, देखे की कहीं कोई चमक वापस हमारी आंखों में तो नही आ रही हैं।

इसके अलावा कुछ गैजेट भी हमें कैमरे को ढूढ़ने में काम आ सकते हैं। RF (रेडियो फ्रीक्वेंसी) सिग्नल डिटेक्टर और बग डिटेक्टर खरीद कर ले आये और हमारे घर और रूम में लगा लें। RF उपकरण छोटे, सस्ते और उपयोग के लिए आसान होते हैं, जबकि बग्स त्वरित फ्रीक्वेंसी जो फैले हुए क्षेत्र की फ्रीक्वेंसी में होती हैं, उन्हें पकड़ने में काम आ सकता है, जिन्हें RF नही पकड़ पाता, जिसके लिए थोड़े अनुभव की जरूरत होती है।

हमे अपने कमरे में भी फिजिकल तरीके से भी कैमरे को ढूंढने की कोशिश करें। अपने कमरे का अच्छे से निरीक्षण करें। ऐसी कोई चीज जो अपनी जगह से हटकर दिखाई दे जैसे कि फूलों का गुलदस्ता, दीवार पर लगी पेंटिंग, लेम्पशेड जो समान्य दिखाई न दे, स्मोक डिटेक्टर, स्पीकर ऐसी ही चीजे जिन्हें आपने नही रखा हो या अपनी जगह से अलग दिखाई दे रही हो उनमें कैमरा हो सकता है। इसके अलावा फूलों के गमले के अंदर, लाइट डिज़ाइन ऐसी चीजें हैं जिनमे माइक्रोफोन लगाया जा सकता है। सोफे के कुशन, अलमारियों के ऊपर नीचे छोटे कैमरों को छुपाने के लिये काम में लाये जा सकते हैं।

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अब स्काईप भी चला व्हाट्सएप, गूगल की राह, Skype also introduce end to end encryption

अब जल्दी ही हमे स्काईप का नया अपडेट मिलने वाला है,जिसमें सभी मेसेज एन्क्रिप्टेड होंगे। व्हाट्सएप यह फीचर पहले ही ला चुका है। Skype में भी व्हाट्सएप, फेसबुक और गूगल एलो की ही तरह सुरक्षा के लिए इसमें एन्क्रिप्शन किया जाएगा। माइक्रोसॉफ्ट ने इसमें एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्शन करने की घोषणा की है, जो कि नए प्रीव्यू में बताया गया है। एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्शन में सिर्फ वेलिड ऑथोरिटी यानी मेसेज भेजने वाला और प्राप्त करने वाला ही पड़ पायेगा।
    अगर और कोई इसे पढ़ने का सोचेगा तो उसे कुछ शब्द और अंक ही दिखाई देंगे जिसे वह पड़ने में असमर्थ होगा। इससे हैकर और गवर्नमेंट भी इसे नही पढ़ पाएगी। अभी स्काइप के कॉल और मेसेज एन्क्रिप्टेड होते हैं पर एन्ड तो एन्ड नही होते हैं। कोई गोपनीय जानकारी भेजने के लिए एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्शन ज्यादा सही होता है।

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कहीं आपके आधार का उपयोग किसी और ने तो नही किया, जानें इसे चेक करने का आसान तरीका, your aadhar card data can not be misused use security

आधार कार्ड का उपयोग अलग-अलग कामों के लिए किया जाता है। इसमें डर भी बना रहता है कि कही इसका कोई गलत इस्तेमाल न कर लें। आधार कार्ड के द्वारा बहुत सारे काम किये जा सकते हैं। 1 मार्च 2018 से तो नये सिम के लिए भी आधार कार्ड का सत्यापन भी जरूरी हो जाएगा, इस तारीख से पहले आपके बर्तमान मोबाइल नम्बरों को आधार से लिंक करना जरूरी है। इसके अलावा वर्चुअल आईडी भी 1 जून 2018 से उपयोग करना शुरू हो जाएगी। आप चाहें तो जान सकते हैं कि आपके आधार डेटा का उपयोग ऑथेंटिफिकेशन के लिए कब-कब इस्तेमाल हुआ है। आपको सबसे पहले UIDAI के ऑथेंटिफिकेशन हिस्ट्री पेज पर जाना है वहाँ आधार नंबर डालना है और साथ मे इमेज के साथ जो केप्चा कोड दिख रहा है उसे भी डाल देना है। इसके बाद जेनरेट OTP पर क्लिक करना है, इसके बाद वन टाइम पासवर्ड उसी मोबाइल पर आएगा जिसे हमनें आधार कार्ड के रजिस्ट्रशन के समय दिया था। इसके बाद आपको अलग अलग ऑथेंटिफिकेशन रिक्वेस्ट को फ़िल्टर करने की सुविधा मिलेगी।

आप बॉयोमेट्रिक, डेमोग्राफिक और अन्य तरीके के फ़िल्टर लगा सकतें हैं। यहाँ पर आप किसी खास तिथियों के बीच में भी जाँच कर सकते हैं। इसकी सीमा 6 महीने की है, यानी कि पिछले 6 महीने में आपके आधार कार्ड का उपयोग किन चीजों के लिए किया गया है किस तरह की चीजों के वेरीफिकेशन के लिए किया गया है ये आप पता कर सकते हैं। इस तरह से आधार ऑथेंटिफिकेशन का विस्तृत व्यौरा देख सकते हैं। ये आप नही जान पाएंगे कि किस कंपनी या एजेंसी ने ऑथेंटिफिकेशन के लिये आपके आधार डेटा का उपयोग किया है। आपको बता दे कि आधार बॉयोमेट्रिक डेटा को आप ऑनलाइन लॉक एवं अनलॉक कर सकते हैं ताकि इसका कोई गलत उपयोग नही कर सके।
   कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने अपने आधार कार्ड का उपयोग नही किया है लेकिन उनको UIDAI से ईमेल आया है कि आपके डेटा को बॉयोमेट्रिक ऑथेंटिफिकेशन के माध्यम से एक्सेस किया गया है, इस परिस्थिति से भी आप बच सकते हैं। सबसे जरूरी ये है कि कोई भी सरकारी कार्यालय या बैंक फ़ोन या ईमेल पर आपकी कोई भी गोपनीय या व्यक्तिगत जानकारी नहीं पूछता। आधार नंबर की जानकारी फ़ोन या ईमेल से नही पूछी जाती है। आपको स्पष्ट हो गया होगा कि कोई आपसे फ़ोन पर आपके आधार नंबर की जानकारी मांगे तो आपको नही देना है।

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गैस सब्सिडी धारकों को बहुत महत्त्वपूर्ण सूचना, Lpg gas subsidy user important notice

भारत सरकार गैस सिलिंडर पर सब्सिडी देती है ताकि हर घर मे गैस सिलिंडर हो और आम आदमी इसका फायदा उठा सके, ऐसे में जरूरी है कि सब्सिडी का पैसा सही एकाउंट में जाये। हाल ही में ऐसे मामले आये हैं कि सब्सिडी का पैसा किसी और के एकाउंट में चले गए या सब्सिडी नही आई। इसके लिए आपको अपना स्टेटस चेक करना चाहिए। आइये हम आपको बताते हैं कि ये काम कैसे किया जा सकता है।
    ओनलाइन सब्सिडी स्टेटस रिपोर्ट देखने के लिए माईएलपीजी.ईन वेबसाइट पर जाना होगा। इस वेवसाईट पर तीन गैस कंपनियों के नाम मिलेंगे। आपने जिस कंपनी का गैस कनेक्शन लिया है उसे सिलेक्ट करना होगा, जहाँ पर एक पेज खुलेगा। इस पेज पर कई विकल्प खुलेगें, जिसमे हमे ऑनलाइन फीडबैक वाले ऑप्शन पर क्लिक करना है। इसके बाद कसटूमर केयर सिस्टम का एक पेज खुलेगा जिसमें आपको डिटेल भरना होगा। जैसे कि अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और LPG आईडी इसे डालते ही सारी जानकारियां मिल जाएगी कि सब्सिडी की राशि कितनी थी और कब डाली गई।इस तरह से पता चल जाएगा कि सब्सिडी आपके एकाउंट में जा रही है या और किसी के एकाउंट में।

अगर आपके पास इंटरनेट सुविधा नही है तो आप टोल फ्री नंबर 18002333555 है, जहाँ आप शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।

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